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आतंकवाद और राजनीति

Posted On 11 Jul, 2016 में

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आतंकवाद और राजनीति
हम भारतवासी प्रजातंत्र में रहते हैं; हमें अपने अधिकारों के लिए कानूनी मान्यताओं के अंतरगत रह कर जागरूक होने की स्वतंत्रता है. साथ ही हमें स्वतंत्रता है विचारों को समाज या प्रशाशन के सामने रखने की और तर्कसंगत न्यायसंगत मांग करने की ताकि प्रशाशन इस पर विचार कर सके. हमें इसकी पूरी आजादी है कि किसी भी राजनीतिक दल के साथ नाता जोड़ें और राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर स्वयं चुनाव में प्रत्याशी के रूप में खड़े हों. यदि हम चाहें तो बिना किसी राजनीतिक दल का हिस्सा बने स्वतंत्र उम्मीदवार होकर भी चुनाव में प्रत्याशी हो सकते हैं. हमें धार्मिक जीवन में भी स्वतंत्रता है. सभी भारतवासियों को चाहे वे किसी भी धर्मं का पालन करें बरावर का नागरिक अधिकार है. हमारा संविधान सभी को समान समझता है चाहे वे देश के किसी भी भाग से हों या उनका कोई भी व्यवसाय या धर्म हो.
अभी जो हंगामा कश्मीर में हो रहा है उस संदर्भ में हमें इसपर ध्यान देना चाहिए कि देश की अखंडता के साथ किसी को भी खिलवाड़ करने की आजादी नहीं है. बुरहान वाणी कश्मीर में आतंक फैलाये हुए था; हमारे सुरक्षा बलों से बच कर वह निकल जाता था. सुरक्षा काम में लगे जवानों को मारना या उन्हें भारी चोट पहुंचाना ही उसका काम था. इतना ही नहीं बुरहान कश्मीर में आतंक फैलाये था और सीधे साधे निर्दोष नागरिकों की हत्या करना उसका काम था. सुरक्षा बलों को बधाई देना चाहिए कि उनके जवानों ने इस आतंकी को मार गिराया. इस आतंक के माहौल को भड़काने औए सहायता कार्य में पाकिस्तान की ख़ास भूमिका रहती है. पाकिस्तान के साथ बहुत ही सख्ती से बात करने की आवश्यकता है. पर सवाल यह उठता है कि पाकिस्तान के साथ बात करने में कौन सम्मिलित हो. हमारे प्रधान मंत्री पाकिस्तान के प्रधान मंत्री से बात कर आपसी संबंधों के सुधार का अभियोजन कर सकते हैं. जहां तक नवाज़ शरीफ से सम्बन्ध है यहाँ बात हो सकती है और सफलता की उम्मीद भी है. अफ़सोस है कि नवाज़ शरीफ की या किसी भी पाकिस्तानी प्रधान मंत्री की कोई पूछ पाकिस्तान में नहीं है. असल सत्ता तो पाकिस्तानी सेना और खुफिया विभाग ISI के हाथ है और इनका काम लश्कर-इ-तईबा और अन्य आतंकी संगठनों के साथ मिलकर भारत में आतंक का माहौल रखना है. इस आतंक के जाल को फैलाने वालों से हमारे जवान लड़ते रहते हैं और सारा देश दिल की गहराईयों से उनके त्याग के लिए कृतज्ञता व्यक्त करता है.
अफ़सोस होता है जब हमारे विरोधी दलों के नेता सत्ता में रहे भारत प्रशाशन को इसके लिए जिम्मेवार साबित करने की कोशिश करते हैं कि प्रशाशन आतंक के खिलाफ निरंतर अभियान को सक्रिय रखता है और सुरक्षा बलों से जुड़े हुए जवान अपनी जान पर खेलकर आतंकियों को मार गिराने या जीवित पकड़ने के लिए तैयार रहते हैं. ऐसे में सुरक्षा में कार्यरत जवानों के सामर्थ्य की प्रशंशा करने या उनकी हौसला अफजाई करने के स्थान में निरंतर ये विरोधी दलों के नेता वर्तमान केंद्रीय प्रशाशन के कामों की टिप्पणियां करते रहते है और यह बताने की कोशिश करते है कि आतंकियों के नाम पर हमारी केंद्रीय सरकार निर्दोष युवकों की हत्या में लगी है. अंग्रेजी माध्यम के समाचार पत्रों में तो बुरहान जैसे आतंकी को परम वीर कहा जाता है और इसकी मांग भी की गयी है कि बुरहान को शहीद का दर्ज़ा दिया जाए. मैं इन समाचार पत्रों के पाठको से यह पूछना चाहूँगा कि अंग्रेजी समाचार पत्रों के ऐसी विचार धारा को कब तक प्रोत्स्साहन देंगे. यदि भारत के लिए आपके मन में थोडा भी लगाव है तो क्या यह प्रासंगिक नहीं होगा कि ऐसे राष्ट्र विरोधी समाचार पत्रों तथा संबधित पत्रकारों का आप वहिष्कार करें.
मुझे आश्चर्य हो रहा है की अभी तक कोई राजनेता या समाचार पत्र का सम्पादक इस्लामी preacher जाकिर नायक के बचाव में नहीं आया है. जाकिर नायक धर्मं की आड़ में घृणा का ज़हर हमारे देश में फैलाता है. जाकिर नायक के सम्बन्ध में पिछली UPA सरकार ने कुछ गंभीरता दिखा कर उनके खिलाफ कानूनी कारवाई करने का विचार प्रदर्शन किया था पर फिर डर गयी कि इस धार्मिक प्रचारक को मुस्लिम समुदाय का बहुत समर्थन प्राप्त है और इनके खिलाफ कोई कानूनी कदम उठाने से मुस्लिम समुदाय का वोट नहीं मिल पायेगा और इस कारण UPA सरकार ने इस आतंकी को आज़ाद होकर धर्मं के नाम पर ज़हर उगलने को नहीं रोका. UPA सरकार की अगुआ कांग्रेस पार्टी थी और उन्हें लालू यादव जैसों का सपोर्ट भी था. UPA का यह फैसला मुस्लिम समुदाय के प्रति गलत विचारधाराओं की ओर संकेत करता है जो मुस्लिम समुदाय की देशभक्ति पर निराधार संदेह की ओर संकेत करता है. यह मैं आशा करता हूँ की मुस्लिम समुदाय जाकिर नायक को जेल भेजने को सही क़दम कहेगा. अभी भारत के एक नगर में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एकजुट होकर जाकिर को जेल देने की मांग को सही बताया है और इस समुदाय पर हमें पूरा भरोसा है. UPA या कांग्रेस को सीख मुस्लिम समुदाय द्वारा दी जानी चाहिए कि यह समुदाय भारत प्रेमी है और उतना ही तत्पर है देश की अखंडता की रक्षा करने हित जितना कोई भी भारत का सपूत होगा.



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