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सबका साथ सबका विकास - नयी सामाजिक व्यवस्था

Posted On: 3 Apr, 2017 में

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किसी भी समाज या देश के विकास के लिए यह आवश्यक है कि सभी वर्गों या समुदायों के सम्मिलित विकास पर बल दिया जाए. देश की आर्थिक कमजोरी तभी दूर होगी जब सभी को साथ लेकर हम चलें. हमारा धर्मं चाहे जो भी हो देश को सबल एवं समृद्ध बनाने के लिए यह आवश्यक है कि हिंदू, मुसलिम, सिख, ईसाई तथा और धर्मों के लोग मिल जुल कर सभ्य नागरिक के रूप में रहने और सद् विचार का आचरण करें.
अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश वासियों ने बीजेपी को बहुमत से प्रदेश शासन की अनुमति प्रदान किया है. यह गर्व का विषय है कि प्रदेश में पिछले १५ वर्षों से जो हिन्दू मुसलिम के भेद भाव पर जोर देते हुए अराजकता थी अब प्रदेश की जनता ने इन राजनीतिक तत्वों को पराजित किया है. पिछड़े वर्ग एवं दलित के नाम पर राजनीति करनेवालों को करार सबक मिला है. बीजेपी के लिए यह चुनौती है कि इन तत्वों को फलने फूलने के लिए उचित आधार बनाने का अवसर नहीं दे. जातिवाद एवं वंशवाद की प्रथा पर समुचित अंकुश लगे और दलितों को गुमराह करने वालों को सीधा सख्त सन्देश दिया जाए.
यह साफ है बिना मुसलिम समुदाय के सहयोग से बीजेपी की प्रचंड जीत नहीं हो पाती. मुसलिम समुदाय को भारत को सबल बनाने में उतनी ही तत्परता है जितनी हिन्दू समुदाय को.
जो मुसलमान धर्मं गुरु या ठेकेदार हैं उन्हें अवश्य परिशानी है इस बात से जब वे देखते हैं मुस्लिन समुदाय जागरूक हो रहा है और इस्लाम के ग़लत प्रचार के बोझ से अपने को मुक्त करना चाहता है. मुसलिम महिलाओं की सूझ बूझ की मैं सराहना करूंगा वे अधिक जागरूक हो रहीं हैं और प्रजातान्त्रिक मूल्यों में अपनी आस्था घोषित कर रहीं हैं.

उत्तर प्रदेश बहुत ही भाग्यशाली है. योगी आदित्यनाथ जैसा नेता इस प्रदेश को मुख्य मंत्रि के रूप में मिला है.
प्रदेश की समृद्धि के लिए प्रदेश के नागरिकों को स्वस्थ रहना ज़रूरी है. इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की सरकार ने निर्णय लिया जिसके अंतर्गत उन कसाई खानों को बंद कर दिया जाएगा जो बिना लाइसेंस के काम कर रहे हैं. सरकार के इस निर्णय के खिलाफ सस्ती बडाई के लिए विपक्षी राजनेताओं ने घडियाली आंसू बहाना शुरू कर दिया उन लोगों के पक्ष में जो बिना लाइसेंस के कसाईखाना चलाते हैं.
बिना लाइसेंस के अवैध बूचडखानों में क्या बिकता है इस पर किसी राजनेता ने ध्यान नहीं दिया. वे ध्यान दे भी तो क्यों. उन्हें तो घडियाली आंसू बहाने का मौका चाहिए इस सद्भावना के पक्ष में और जताना है दर्द उनलोगों के लिए जो अपना रोज़गार खो जायेंगे. बूचडखानों को यह नहीं कहेंगे लाइसेंस लो. यह है राजनीति और हम सभी उसके ग़ैर इमानदारी के शिकार हैं.
मुझे पढने का अवसर मिला इन अवैध बूचडखानों में क्या बिकता है. और यह सच है. यह इस ब्यान पर आधारित है जो लखनऊ के नौशिजान रेस्टोरेंट के मालिक शमील शमशी ने कैमरे पर स्वीकार किया है. उनका कहना है इन अवैध बूचडखानों में मरे हुए जानवर, गंभीर रूप से बीमार जानवर यहाँ तक बकरे की बजाय आवारा कुत्ते तक काट के उनका मांस बेच दिया जाता है. श्री शम्सी ने इसकी पुरज़ोर सराहना की जब ऐसे जगहों पर ताला लगाने का फैसला लिया गया. लोगों के सेहत का ख्याल वर्त्तमान राज्य सरकार को है. इस सरकार को किसी समुदाय को ऊपर और किसी को नीचा करने का लक्ष्य रखकर वोट समेटना नहीं है. यह सही माने में सभी के हित में काम करने वाली सरकार है. वंश वाद या मुस्लिम समुदाय को बहका कर या दलितों के नाम पर राजनीति कर वोट बटोरना योगी जी की मंशा नहीं है. हमारी जनता इसे समझे दूध का दूध और पानी के पानी को अलग करे और इस पर गौर करें आज़ादी के सत्तर सालों के बाद भी हम ग़रीब क्यों हैं. हमारी ग़रीबी तो गयी नहीं राजनेता ज़रूर अमीर बनते जा रहे हैं. मैं केवल हिन्दू राजनेताओं के अमीर होने की और आपका ध्यान नहीं ले जा रहा हूँ. इन हिन्दू राजनेताओं के साथ काम करनेवाले मुस्लिम राजनेता भी धन जुटाने में लगे रहे और इस्लाम के नाम की रक्षा करने के बहाने मुस्लिम समुदाय को प्रगति पथ पर ले जाने के बजाये खुद को अमीर बनाने में लगे रहे.

योगी जी ने और कई क़दम उठाये हैं जो महिलाओं की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है. इसमें केंद्रीय सरकार की भी मदद राज्य सरकार को मिलेगी क्योंकि मुस्लिम महिलाओं के उत्थान में केंद्र की सरकार भी संलग्न है. लेकिन सरकार खुद सफल हो नहीं सकती जब तक आम जनता का सक्रिय सहयोग न हो.
खास कर धर्मं के नाम पर महिलाओं को दबा कर रखने की जो प्रथा भारत में है उसका खात्मा ज़रूरी है. आशा है बीजेपी सरकार मज़हबी ठेकेदारों के चंगुल से बाहर निकलेगी और चाहे दूसरी राजनीतिक पार्टियाँ इसमें साथ दे या न दे मुसलिम महिलाओं के सहयोग से तथा प्रगतिशील मुसलिम समुदाय के सहयोग से महिलाओं को आगे बढ़ने के क़दम पर सफलता अवश्य मिलेगी. केंद्र की सरकार को इस बारे में ठोस क़दम उठाने की ज़रुरत है और ऐसे जजों की छुट्टी होनी चाहिए जिनकी रीढ़ की हड्डियों में धार्मिक ठेकेदारों और विपक्षी दलों के उन नेताओं को दरकिनार करने की ताक़त नहीं है जो मज़हबी ठेकेदारों के साथ हाँ में हाँ मिलाते हैं. हमारी मुस्लिम बहनों के कल्याण की भावना इन विपक्ष के राजनेताओं में नहीं है समय आ गया है जब हमारी मुस्लिम बहने एक जुट हो अपने कल्याण की बात सोचें और राजनेताओं को खुला सन्देश दें उनकी आँखें अब खुल गयी हैं. भारत में प्रजातंत है प्रजातंत्र क़ानून से चलता है हमारा संविधान है जो हमें समानता का अधिकार देता है. सभी मुस्लिम बहुतायत देशों में शरीया नियम के मुताबिक तीन बार तलाक़ के नाम पर महिलाओं को पुरुषों की तुलना में नीचा नहीं समझ जाता. इसलिए हमारे भारत के मुसलिम धर्मगुरु शरिया का हवाला देकर तलाक़ की प्रक्रिया को इस्लाम के नाम पर सही ठहरा कर गुमराह नहीं कर सकते. भारत में जो प्रक्रिया नियमों के अनुकूल है उसी प्रक्रिया से मुसलिम समुदाय को भी चलना है.
यहां आवश्यकता है मुसलिम बहने इस समाचार पत्र के माध्यम से अपना विचार हमें अवगत कराएं और तब देश व्यापी समर्थन हमारी केंद्रीय सरकार को मिलेगा और नियमानुकूल सही क़दम केंद्रीय सरकार इस दिशा में ले सकेगी.

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